दिन में पाँच अलार्म।
मेरी माँ की तकनीक से ज़्यादा नहीं बनती, इसलिए मैं खुद उनके फ़ोन में अलार्म सेट करता था: गोलियाँ सुबह 9 और शाम 6 बजे, और इंसुलिन सुबह, शाम और रात को। दिन में पाँच अलार्म। फिर भी वह पक्का करने के लिए समय एक काग़ज़ पर लिख लेती थीं।

सब कुछ एक नोटिफ़िकेशन पर ख़त्म होता था।
मैंने पिलबॉक्स, ऐप, हर वह चीज़ ढूँढी जो मेरे मन की बात से मिलती-जुलती थी। पर उन्हें इस्तेमाल करने के लिए मुझे पास बैठकर सेट करना और समझाना पड़ता था। और सब का अंत एक जैसा होता: एक नोटिफ़िकेशन। जो तब आता जब फ़ोन पास न होता। जो किसी सहेली के मैसेज, किसी ईमेल या किसी विज्ञापन में घुल-मिल जाता। जिसे कभी-कभी कोई नहीं देखता। और कोई ख़ुराक छूट जाती।
नोटिफ़िकेशन सैकड़ों में खो जाता है।
कॉल को आप हमेशा देखते हैं।
मैं उन्हें कॉल करता था।
अक्सर मैं ही इसे सँभालता था: उन्हें याद दिलाने के लिए, या यह पूछने के लिए कि दवा ली या नहीं, कॉल करता था। और यह काम करता था। मैंने धीरे-धीरे, ज़ोर से सोचते हुए, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से बात करनी शुरू की। पहले एक चैट बनाई जो हर ख़ुराक याद दिलाती, जिसमें वह «हो गया» दबातीं, और न दबाने पर मुझे बताती। पर वह फिर भी एक और सूचना ही थी। फिर एक दिन मैंने खुद से एक सवाल पूछा: अगर मेरे कॉल करने से काम होता है, तो कोई चीज़ मेरी जगह उन्हें कॉल क्यों नहीं कर सकती? ऐसे जन्मा Memoriia: याद, AI के साथ।
मेरे पिता, वे भी दूर।
मेरे पिता दूर रहते हैं और उन्हें ब्लड प्रेशर की समस्या है। कभी वे घबरा जाते हैं, कभी प्रेशर गिर जाता है। उन्हें कुछ हो सकता था और मुझे पता भी नहीं चलता। ऐसे यह विचार बढ़ा: एक घड़ी जो बताए अगर वे गिरें या उनकी नब्ज़ सामान्य से बाहर जाए।
मैंने सब दाँव पर लगा दिया।
मेरे पीछे कोई टेक कंपनी नहीं थी, न कोई संरक्षक, न कोई निवेश। मेरे पास एक असली समस्या थी और जो कुछ हाथ में था। मेरी नौकरी चली गई थी। मैं कंप्यूटर के सामने बैठा और सब दाँव पर लगा दिया। मैंने खुद सीखा है: प्रोग्राम करते-करते प्रोग्रामिंग सीखी। महीनों तक घंटों-घंटों काम किया। फिर मुझे दोबारा नौकरी मिली और मैं फिर भी थोड़ा-थोड़ा करके इसे बनाता रहा।
मैंने वह सीखा जो कोई नहीं सिखाता: उरुग्वे का होकर अमेरिका में कंपनी बनाना, उसे Meta से वेरिफ़ाई करवाना, काग़ज़ी काम, क़ानूनी बातें। वह सब जो ज़्यादातर लोगों को रोक देता है। मैं नहीं रुका।
क्या बदला।
आज मेरी माँ पाँच अलार्म और समय वाले काग़ज़ से सिर नहीं खपातीं। मेरे पिता, जो पहले दवा नहीं लेते थे, अब लेते हैं: प्रेशर की और बाकी भी, हर एक अपने समय पर। और दोनों दवा लेते ही «हो गया» दबा देते हैं, ताकि मुझे चिंता न हो। अगर वे भूल जाएँ, तो Memoriia उन्हें कॉल करता है। और अगर वे उठा लें, तो मुझे पता भी नहीं चलता।
यह उन्हें हर चीज़ से नहीं बचाएगा।
पर अगर कुछ हुआ, तो मुझे पता चलेगा।
सबके लिए।
मैंने इसे बेचने के बारे में सोचकर नहीं बनाया। मैंने इसे अपने माता-पिता की मदद के लिए बनाया। पर अगर यह उनके काम आता है, तो इसे हर उस व्यक्ति को क्यों न दूँ जिसे इसकी ज़रूरत है?
उनके लिए जिनके माता-पिता मेरी तरह दूर रहते हैं और जानते हैं कि कोई गिरावट हो सकती है और उन्हें पता भी न चले। उनके लिए जिन्हें ADHD है और चीज़ें छूट जाती हैं। उनके लिए जो तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी जीते हैं और मीटिंग, काम, सब कुछ भूल जाते हैं।
यह सिर्फ़ दवा के लिए नहीं है: यह हर उस चीज़ के लिए है जो आप याद रखना चाहते हैं, WhatsApp पर, बिना कुछ नया सीखे। क्योंकि Memoriia का रिमाइंडर एक और नोटिफ़िकेशन नहीं है। यह ऐसा रिमाइंडर है जो आपको कॉल करता है।
किसी भी सेवा की तरह इसका शुल्क है: हर मैसेज और हर कॉल के पीछे एक ढाँचा है जिसका ख़र्च उठाना पड़ता है। काश मैं इसे मुफ़्त दे पाता।
अगर आपका भी कोई दूर है, या कुछ ऐसा है जिसे आप भूल नहीं सकते, तो यह कहानी आपकी भी है।
— Adrián
पुनश्च: मेरी माँ ने वह काग़ज़ आज भी संभालकर रखा है।
Memoriia आज़माएं